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यूआरएल में बदलाव करके साइट का प्रोटोकॉल बदलना

इस लेख में, साइट के मौजूदा पेजों के यूआरएल में बदलाव करने के तरीकों के बारे में बताया गया है. इन तरीकों से, Google Search के नतीजों में आपके पेजों की परफ़ॉर्मेंस पर कम से कम असर पड़ेगा. यूआरएल में बदलाव करके, साइट का प्रोटोकॉल बदलने के कुछ उदाहरण नीचे दिए गए हैं:

  • यूआरएल का HTTP से HTTPS में बदलना
  • डोमेन नेम में बदलाव, जैसे कि example.com से example.net में बदलना या कई डोमेन या होस्टनेम को मर्ज करना
  • यूआरएल पाथ में बदलाव: example.com/page.php?id=1 से example.com/widget या example.com/page.html से example.com/page.htm

खास जानकारी

  1. साइट का प्रोटोकॉल बदले जाने के बारे में बुनियादी जानकारी की समीक्षा करें. जानें कि इससे क्या होगा और इससे आपके उपयोगकर्ताओं और रैंकिंग पर किस तरह असर पड़ सकता है. अगर साइट को एचटीटीपी से एचटीटीपीएस पर ले जाया जा रहा है, तो एचटीटीपीएस को इस्तेमाल करने के लिए सबसे सही तरीके देखें.
  2. नई साइट बनाएं और उसकी अच्छी तरह से जांच करें.
  3. मौजूदा यूआरएल और उनके नए फ़ॉर्मैट के बीच यूआरएल मैपिंग तैयार करें.
  4. पुराने यूआरएल से नए यूआरएल पर रीडायरेक्ट करने के लिए, सर्वर को कॉन्फ़िगर करके साइट का प्रोटोकॉल बदलना शुरू करें.
  5. पुराने और नए, दोनों यूआरएल के ट्रैफ़िक पर नज़र रखें.

यूआरएल में बदलाव करके, साइट का प्रोटोकॉल बदलने के सभी तरीकों के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

  • क्या Google, साइट को एक बार में माइग्रेट करने की सलाह देता है या इसे अलग-अलग सेक्शन में माइग्रेट करना ठीक रहेगा?
    साइट को अलग-अलग सेक्शन में माइग्रेट करना ठीक है.
  • कैसे देखें कि कितने पेजों को इंडेक्स किया गया था?
    Search Console में हर प्रॉपर्टी के लिए डेटा की अलग से पुष्टि करें. ज़्यादा जानकारी के लिए, इंंडेक्स की स्थिति से जुड़ी रिपोर्ट का इस्तेमाल करें. साइटमैप की रिपोर्ट का इस्तेमाल करके देखें कि साइटमैप में सबमिट किए गए कितने यूआरएल को इंडेक्स किया गया है.
  • यूआरएल में हुए बदलावों की पहचान करने में Google को कितना समय लगेगा?
    कोई तय क्रॉल फ़्रीक्वेंसी नहीं होती है; बदलावों की पहचान करने में लगने वाला समय, आपकी साइट के साइज़ और क्रॉलिंग की रफ़्तार पर निर्भर करता है. एक बार में एक ही यूआरएल का प्रोटोकॉल बदला जाता है.
  • क्या नए यूआरएल पर रीडायरेक्ट करने से, साइट की रैंक पर असर पड़ता है?
    नहीं, 301 या 302 रीडायरेक्ट की वजह से PageRank में कमी नहीं आती है.

साइट को एचटीटीपी से एचटीटीपीएस पर माइग्रेट करना

  • एचटीटीपीएस पर माइग्रेट करने के सबसे सही तरीके देखें.
  • Search Console में एचटीटीपीएस प्रॉपर्टी ज़रूर जोड़ें. Search Console, एचटीटीपी और एचटीटीपीएस को अलग-अलग देखता है; Search Console में इन प्रॉपर्टी का डेटा शेयर नहीं किया जाता है. इसलिए, अगर आपके पेज दोनों तरह के प्रोटोकॉल में मौजूद हैं, तो आपके पास हर पेज के लिए Search Console की अलग प्रॉपर्टी होनी चाहिए.

एचटीटीपी से एचटीटीपीएस पर माइग्रेट करने के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या एचटीटीपीएस पर माइग्रेट करने से, साइट की रैंकिंग पर असर पड़ेगा?

हो सकता है कि जब आप साइट के सभी पेजों को एक प्रोटोकॉल से दूसरे में माइग्रेट करें, तो आपको साइट की रैंकिंग में कुछ उतार-चढ़ाव दिखे. हालांकि, एचटीटीपीएस पर माइग्रेट करते समय होने वाली परेशानियों से बचने के लिए, एचटीटीपीएस पेजों के लिए सबसे सही तरीकों की जानकारी देखें.

एचटीटीपीएस पर माइग्रेट करने से, साइटों की रैंकिंग में थोड़ी बढ़त होती है, लेकिन किसी बड़े बदलाव की उम्मीद न करें. Google किसी साइट को अच्छी रैंकिंग देने के लिए एचटीटीपीएस को भी आधार मानता है. हालांकि, अच्छी रैंकिंग देने के और भी कई आधार हैं. साइट पर अच्छी क्वालिटी के कॉन्टेंट की तुलना में एचटीटीपीएस की अहमियत फ़िलहाल कम है. साइट को एचटीटीपीएस पर ले जाने के कुछ ही समय बाद, आपको एसईओ में किसी बड़े फ़ायदे की उम्मीद नहीं करनी चाहिए. हो सकता है कि बाद में, Google, एचटीटीपीएस बूस्ट की अहमियत बढ़ा दे.

क्या सिर्फ़ कुछ पेजों को एचटीटीपीएस पर ले जाना ठीक होगा?

हां, ऐसा करना ठीक रहेगा. साइट के किसी भी हिस्से से शुरुआत करें और उसकी जांच कर लें. सब ठीक हो, तो फिर दूसरे हिस्सों को भी अपने हिसाब से दूसरी जगह पर ले जाएं.

अगर साइट के अलग-अलग हिस्सों को एचटीटीपी से एचटीटीपीएस पर ले जाया जा रहा है और आपको स्टेज किए गए यूआरएल को समय से पहले इंडेक्स नहीं करना है, तो हमारा सुझाव है कि आप रीडायरेक्ट के बजाय rel=canonical का इस्तेमाल करें. अगर रीडायरेक्ट का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, तो रीडायरेक्ट किए गए पेजों की जांच नहीं की जा सकेगी.

क्या rel=canonical टैग की मदद से यह पक्का किया जाता है कि एचटीटीपी यूआरएल को इंडेक्स किया जा चुका है?

नहीं, लेकिन यह एक अहम सिग्नल है जिससे पता चलता है कि यूआरएल को इंडेक्स किया जा चुका है.

Google किस सर्टिफ़िकेशन वाले यूआरएल को इस्तेमाल करने का सुझाव देता है?

Google Search के लिए, मॉडर्न सर्टिफ़िकेशन वाले ऐसे किसी भी यूआरएल का इस्तेमाल किया जा सकता है जो मॉडर्न ब्राउज़र पर काम करता हो.

क्या साइट को एचटीटीपीएस पर ले जाने के बाद, सर्च कीवर्ड बदल जाते हैं?

साइट को एचटीटीपीएस पर ले जाने से, इनमें बदलाव नहीं होता है. आपके पास अब भी Search Console में खोज क्वेरी देखने का विकल्प है.

मैं कैसे देखूं कि कितने पेज इंडेक्स हुए थे?

Search Console में, एचटीटीपी और एचटीटीपीएस प्रोटोकॉल की अलग से पुष्टि करें. साथ ही, इंडेक्स कवरेज रिपोर्ट का इस्तेमाल करके देखें कि किन पेजों को इंडेक्स किया गया है.

साइट के प्रोटोकॉल को एचटीटीपी से बदलकर एचटीटीपीएस करने में कितना समय लगेगा?

कोई तय क्रॉल फ़्रीक्वेंसी नहीं होती है; यह आपकी साइट के साइज़ और क्रॉलिंग की रफ़्तार पर निर्भर करता है. एक बार में एक ही यूआरएल का प्रोटोकॉल बदला जाता है.

हम robots.txt में अपने एचटीटीपी साइटमैप के लिंक देते हैं. क्या हमें अपने नए एचटीटीपीएस साइटमैप को शामिल करने के लिए, robots.txt को अपडेट करना चाहिए?

हमारा सुझाव है कि आप अपनी robots.txt फ़ाइल को इस तरह अपडेट करें, ताकि वह आपकी साइटमैप फ़ाइलों के एचटीटीपीएस वर्शन पर ही ले जाए. साथ ही, हमारा सुझाव है कि आप अपने साइटमैप में सिर्फ़ एचटीटीपीएस यूआरएल शामिल करें.

ध्यान रखें कि अगर आपकी साइट के हर यूआरएल को एचटीटीपी से एचटीटीपीएस पर रीडायरेक्ट किया जाता है, तब भी क्रॉलर के पास आपकी सिर्फ़ एक robots.txt फ़ाइल का ऐक्सेस होगा. उदाहरण के लिए, अगर https://example.com/robots.txt, https://example.com/robots.txt पर रीडायरेक्ट करता है, तो एचटीटीपी वर्शन का कॉन्टेंट, Google और अन्य सर्च इंजन को नहीं दिखेगा.

एचटीटीपीएस पर माइग्रेट करने के ट्रायल के दौरान, साइट के किसी सेक्शन को मैप करने के लिए, किस साइटमैप का इस्तेमाल करना चाहिए?

आपके पास अपनी साइट के अपडेट हो चुके सेक्शन के लिए अलग से साइटमैप बनान का विकल्प है. ऐसा करके, आप ट्रायल सेक्शन को इंडेक्स करने की प्रोसेस पर ज़्यादा बारीकी से नज़र रख पाएंगे. हालांकि, ध्यान रखें कि इन यूआरएल के डुप्लीकेट अन्य साइटमैप पर मौजूद न हों.

अगर हम रीडायरेक्ट (एचटीटीपी से एचटीटीपीएस या इसका उलटा) का इस्तेमाल करते हैं, तो हमें साइटमैप में किन यूआरएल को शामिल करना चाहिए?

अपने साइटमैप में, सभी नए एचटीटीपीएस यूआरएल शामिल करें और पुराने एचटीटीपी यूआरएल हटा दें. अगर आपको नया साइटमैप बनाना है, तो उसमें सिर्फ़ नए एचटीटीपीएस यूआरएल शामिल करें.

क्या हमें साइटमैप के एचटीटीपीएस वर्शन के लिए, robots.txt में कुछ और चीज़ें भी जोड़नी होंगी?

नहीं.

क्या हमें एचएसटीएस का इस्तेमाल करना चाहिए?

एचएसटीएस सुरक्षा बढ़ाता है, लेकिन आपकी रोलबैक रणनीति को जटिल बनाता है. ज़्यादा जानकारी के लिए, एचटीटीपीएस पर माइग्रेट करने से जुड़े सबसे सही तरीके देखें.

हम अपनी पूरी साइट के लिए एक ही Google News साइटमैप का इस्तेमाल करते हैं. अपनी साइट के अलग-अलग सेक्शन को माइग्रेट करते समय, हमें क्या करना चाहिए?

अगर आपको नए एचटीटीपीएस सेक्शन के लिए Google News साइटमैप इस्तेमाल करना है, तो आपको News की टीम से संपर्क करना होगा और उन्हें प्रोटोकॉल में होने वाले बदलाव के बारे में बताना होगा. इसके बाद, अपनी साइट के हर सेक्शन को माइग्रेट करते समय, Search Console की अपनी एचटीटीपीएस प्रॉपर्टी में नया Google News साइटमैप सबमिट किया जा सकता है.

एचटीटीपीएस पर माइग्रेट करने के लिए, क्या Google News प्रकाशक केंद्र से जुड़े कोई खास सुझाव हैं?

Google News प्रकाशक केंद्र, साइट को एचटीटीपी से एचटीटीपीएस पर ले जाने की प्रोसेस को पारदर्शिता के साथ मैनेज करता है. अगर News साइटमैप का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है, तो Google News के मुताबिक आपको कुछ करने की ज़रूरत नहीं है. News साइटमैप का इस्तेमाल करने पर News की टीम से संपर्क करें और उन्हें बदलाव के बारे में बताएं. आपके पास टीम को सेक्शन बदलने के बारे में भी बताने का विकल्प है. उदाहरण के लिए, अगर साइट को एचटीटीपीएस पर ले जाया जा रहा है, तो उन्हें बताया जा सकता है कि साइट को https://example.com/section से https://example.com/section पर ले जाया जा रहा है.

नई साइट बनाना

हर साइट को माइग्रेट करने के लिए की जाने वाली तैयारी अलग-अलग होती है, लेकिन आम तौर पर आपको इनमें से एक या एक से ज़्यादा काम करने होते हैं:

  • नया कॉन्टेंट मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएस) बनाएं और उसमें कॉन्टेंट जोड़ें.
  • ऐसी इमेज और डाउनलोड की गई फ़ाइलों को ट्रांसफ़र करें जिन्हें फ़िलहाल होस्ट किया जा रहा है. इनमें, PDF दस्तावेज़ जैसी फ़ाइलें शामिल हैं.
    इन पर शायद Google Search या लिंक से पहले से ही ट्रैफ़िक आ रहा हो. इनकी नई जगह के बारे में उपयोगकर्ताओं और Googlebot को बताना कारगर साबित होता है.
  • साइट को एचटीटीपीएस पर ले जाने के लिए, ज़रूरी TLS प्रमाणपत्र पाएं और उन्हें अपने सर्वर पर कॉन्फ़िगर करें.

अपनी नई साइट के लिए robots.txt सेट अप करना

किसी साइट के लिए robots.txt फ़ाइल यह कंट्रोल करती है कि Googlebot, साइट के किन हिस्सों को क्रॉल कर सकता है. पक्का करें कि आपकी नई साइट की robots.txt फ़ाइल में मौजूद डायरेक्टिव, उन हिस्सों को सही तरीके से दिखाते हों जिन्हें आप क्रॉल होने से रोकना चाहते हैं.

ध्यान दें कि कुछ साइटों के मालिक डेवलपमेंट के दौरान सभी तरह की क्रॉलिंग पर रोक लगा देते हैं. अगर इस रणनीति का इस्तेमाल किया जाता है, तो इस बात की तैयारी ज़रूर कर लें कि साइट को एक जगह से दूसरी जगह भेजना शुरू करने के बाद, robots.txt फ़ाइल किस तरह दिखनी चाहिए. इसी तरह, अगर आप डेवलपमेंट के दौरान noindex डायरेक्टिव इस्तेमाल करते हैं, तो उन यूआरएल की सूची बना लें जिनसे आप noindex डायरेक्टिव हटाएंगे. ये डायरेक्टिव, साइट को एक जगह से दूसरी जगह भेजना शुरू करने पर हटाए जाते हैं.

मिटाए गए या मर्ज किए गए कॉन्टेंट के लिए गड़बड़ियां देना

पक्का करें कि पुरानी साइट से नई साइट पर ट्रांसफ़र न होने वाले कॉन्टेंट के यूआरएल, सही तरीके से एचटीटीपी 404 या 410 वाली गड़बड़ी का रिस्पॉन्स कोड दिखाएं. आप नई साइट के कॉन्फ़िगरेशन पैनल में पुराने यूआरएल के लिए गड़बड़ी का रिस्पॉन्स कोड दिखा सकते हैं. इसके अलावा, आप नए यूआरएल के लिए रीडायरेक्ट बनाकर एचटीटीपी गड़बड़ी कोड दिखा सकते हैं.

पक्का करें कि Search Console की सेटिंग सही हों

साइट को बिना समस्या के एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए, Search Console की सेटिंग सही और अप-टू-डेट होनी चाहिए.

अगर आपने अब तक ऐसा नहीं किया है, तो Search Console में पुष्टि करें कि पुरानी और नई, दोनों साइटों पर आपका मालिकाना हक है. पुरानी और नई, दोनों साइटों के सभी वैरिएंट की पुष्टि करना न भूलें. उदाहरण के लिए, www.example.com और example.com की पुष्टि करें. साथ ही, अगर आप एचटीटीपीएस यूआरएल इस्तेमाल करते हैं, तो आपको साइट के एचटीटीपीएस और एचटीटीपी वर्शन को इसमें शामिल करना चाहिए. इसे पुरानी और नई, दोनों साइटों के लिए करें.

Search Console पर पुष्टि की प्रक्रिया की समीक्षा करना

पक्का करें कि साइट को दूसरी जगह भेजने के बाद भी Search Console पर पुष्टि की प्रक्रिया लागू रहे. अगर आप पुष्टि के लिए पहले से अलग तरीके का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो ध्यान रखें कि यूआरएल बदलने पर पुष्टि वाले टोकन अलग हो सकते हैं.

अगर आप Search Console में अपनी साइट के मालिकाना हक की पुष्टि के लिए एचटीएमएल फ़ाइल वाला तरीका इस्तेमाल कर रहे हैं, तो पुष्टि वाली मौजूदा फ़ाइल को साइट की नई कॉपी में शामिल करना न भूलें.

इसी तरह, अगर आप शामिल की गई ऐसी फ़ाइल से मालिकाना हक की पुष्टि कर रहे हैं जो मेटा टैग या Google Analytics की जानकारी दिखाती है, तो पक्का करें कि कॉन्टेंट मैनेजमेंट सिस्टम की नई कॉपी में यह भी शामिल हो.

Search Console में कॉन्फ़िगर की गई किसी सेटिंग की समीक्षा करना

अगर आपने पुरानी साइट के लिए Search Console में कॉन्फ़िगरेशन की कोई सेटिंग बदली हैं, तो पक्का करें कि उन बदलावों को दिखाने के लिए, नई साइट की सेटिंग भी अपडेट की गई हों. उदाहरण के लिए:

  • यूआरएल पैरामीटर: अगर आपने पुराने यूआरएल के क्रॉल या इंडेक्स होने की प्रक्रिया को कंट्रोल करने के लिए, यूआरएल पैरामीटर को कॉन्फ़िगर किया हुआ है, तो पक्का करें कि ज़रूरत पड़ने पर ये सेटिंग नई साइट पर भी लागू हों.
  • इलाके के हिसाब से टारगेट करना: शायद आपकी पुरानी साइट पर, इलाके के हिसाब से साफ़ तौर पर टारगेटिंग की गई हो. उदाहरण के लिए, इलाके के हिसाब से टारगेट किया जा सकने वाला डोमेन या देश कोड वाले डोमेन नाम में डॉट के बाद का हिस्सा (जैसे कि .co.uk). अगर आप पहले टारगेट किए गए इलाके में टारगेट करना जारी रखना चाहते हैं, तो नई साइट पर वही सेटिंग लागू करें. अगर आप अपने कारोबार को किसी खास इलाके या देश तक सीमित रखने के बजाय, उसे दुनिया भर में फैलाने के लिए साइट को माइग्रेट कर रहे हैं, तो साइट की सेटिंग वाले पेज पर ड्रॉप-डाउन सूची से सबके लिए मौजूद नहीं चुनें.
  • क्रॉल दर: हमारा सुझाव है कि आप Search Console में पुराने और नए, दोनों यूआरएल के लिए Googlebot की क्रॉल दर सीमित नहीं करें. क्रॉल दर की सेटिंग भी कॉन्फ़िगर नहीं करें. ऐसा तभी करें, जब आपको पता हो कि Googlebot जिस दर से साइट को क्रॉल करता है वह आपकी साइट के लिए ज़्यादा है. अगर आपने पुरानी साइट के लिए Googlebot की क्रॉल दर को पहले ही सीमित किया हुआ है, तो उसे हटाने पर विचार करें. Google के पास ऐसे एल्गोरिदम हैं जो अपने-आप पता लगा लेते हैं कि साइट को माइग्रेट किया गया है. साथ ही, हम Googlebot की क्रॉलिंग में इस तरह का बदलाव करते हैं जिससे हमारे इंडेक्स में दिखे कि साइट को माइग्रेट किया गया है.
  • अस्वीकार किए गए बैकलिंक: अगर आपने पुरानी साइट पर, अस्वीकार किए गए लिंक वाली कोई फ़ाइल अपलोड की है, तो हमारा सुझाव है कि आप उसे नई साइट के Search Console खाते का इस्तेमाल करके फिर से अपलोड करें.

हाल ही में खरीदे गए डोमेन से पुराना डेटा मिटाना

अगर आपकी नई साइट, हाल ही में खरीदे गए डोमेन के लिए है, तो आपको यह पक्का करना चाहिए कि इसमें पहले से मौजूद समस्याएं न रहें. इन सेटिंग की जांच करें:

  • पुराने स्पैम के लिए मैन्युअल ऐक्शन. हमारी स्पैम नीतियों का पालन न करने वाली साइटों के लिए Google, मैन्युअल ऐक्शन ले सकता है. उदाहरण के लिए, Google उन साइटों का दर्जा घटा सकता है या उन्हें खोज के नतीजों से हटा सकता है. Search Console के मैन्युअल ऐक्शन वाले पेज पर जाकर देखें कि नई साइट पर कोई मैन्युअल ऐक्शन लागू किया गया है या नहीं. साथ ही, फिर से शामिल करने का अनुरोध करने से पहले, उस पेज पर बताई गई समस्याओं को हल करें.
  • हटाए गए यूआरएल. पक्का करें कि साइट के पिछले मालिक ने ऐसे यूआरएल न छोड़े हों जिन्हें हटाना ज़रूरी था. खास तौर पर, पूरी साइट से हटाए जाने वाले यूआरएल. साथ ही, अपने कॉन्टेंट के लिए यूआरएल हटाने के अनुरोध सबमिट करने से पहले, पक्का कर लें कि आप समझते हैं कि यूआरएल हटाने वाले टूल का इस्तेमाल कब नहीं करना चाहिए.

वेब ऐनलिटिक्स का इस्तेमाल करना

साइट को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के दौरान, यह ज़रूरी है कि पुरानी और नई, दोनों साइटों के इस्तेमाल का विश्लेषण किया जाए. इस काम में वेब ऐनलिटिक्स सॉफ़्टवेयर मदद कर सकता है. आम तौर पर, वेब ऐनलिटिक्स के कॉन्फ़िगरेशन में, आपके पेजों में एम्बेड किया गया JavaScript शामिल होता है. अलग-अलग साइटों को ट्रैक करने की जानकारी, आपके ऐनलिटिक्स सॉफ़्टवेयर और लॉग, प्रोसेस या फ़िल्टर करने वाली उसकी सेटिंग के आधार पर अलग-अलग हो सकती है. सहायता पाने के लिए, ऐनलिटिक्स सॉफ़्टवेयर वाली कंपनी से संपर्क करें. साथ ही, अगर आप अपने ऐनलिटिक्स सॉफ़्टवेयर के कॉन्फ़िगरेशन में बदलाव करना चाहते हैं, तो इसके लिए यह सही मौका है. अगर आप Google Analytics इस्तेमाल करते हैं और अपनी कॉन्टेंट रिपोर्ट में साफ़ तौर पर अलग-अलग डेटा देखना चाहते हैं, तो हमारा सुझाव है कि नई साइट के लिए नई प्रोफ़ाइल बनाएं.

पक्का करना कि आपके सर्वर में, ज़रूरत के मुताबिक कंप्यूटिंग रिसॉर्स हों

साइट को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के बाद, Google आपकी साइट को सामान्य से ज़्यादा बार क्रॉल करेगा. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि ट्रैफ़िक को पुरानी साइट से नई साइट पर भेजा जाता है. नई साइट पर होने वाले दूसरे क्रॉल के साथ, पुरानी साइट वाली क्रॉलिंग को भी नई साइट पर रीडायरेक्ट किया जाता है. पक्का करें कि आपकी नई साइट में उस बढ़े हुए ट्रैफ़िक को हैंडल करने की क्षमता हो जो Google से आ रहा है.

डेटा हाइलाइटर अपडेट करना

अगर आपने पुराने पेजों को मैप करने के लिए, डेटा हाइलाइटर का इस्तेमाल किया था, तो अपनी नई साइट को भी ज़रूर मैप करें.

अपने एचटीटीपीएस पेज तैयार करते ही, सभी ऐप्लिकेशन के लिंक अपडेट करें. इन लिंक की मदद से, Google Search के खोज नतीजों में दिख रहे आपके वेब पेज किसी ऐप्लिकेशन में खोले जा सकते हैं. नए एचटीटीपीएस यूआरएल पर ले जाने के लिए इन लिंक को अपडेट करें. रीडायरेक्ट इन लिंक के लिए काम नहीं करेंगे. आप जब तक ऐप्लिकेशन के लिंक अपडेट नहीं करते, तब तक मोबाइल ब्राउज़र पर किए गए क्लिक से पेज, ऐप्लिकेशन के बजाय ब्राउज़र में खुलेगा.

पुरानी साइट के यूआरएल को नई साइट के यूआरएल से मैप करना ज़रूरी है. इस सेक्शन में ऐसे सामान्य तरीकों के बारे में बताया गया है जिनसे आप अपनी दोनों साइटों के यूआरएल का सही आकलन कर सकते हैं और उन्हें आसानी से मैप कर सकते हैं. इस मैपिंग को जनरेट करने का तरीका, आपकी मौजूदा वेबसाइट की बनावट और उसे दूसरी जगह ले जाने से जुड़ी जानकारी के आधार पर अलग-अलग होगा.

यूआरएल मैपिंग तैयार करना

पुरानी साइट के यूआरएल को नई साइट के यूआरएल से मैप करना ज़रूरी है. इस सेक्शन में ऐसे सामान्य तरीकों के बारे में बताया गया है जिनसे आप अपनी दोनों साइटों के यूआरएल का सही आकलन कर सकते हैं और उन्हें आसानी से मैप कर सकते हैं. इस मैपिंग को जनरेट करने का सटीक तरीका, आपकी मौजूदा वेबसाइट की बनावट और उसे दूसरी जगह ले जाने से जुड़ी जानकारी के आधार पर अलग-अलग होगा.

पुराने यूआरएल तय करना

साइट को सामान्य तरीके से माइग्रेट करने पर, हो सकता है कि आपको पुराने यूआरएल की सूची न बनानी पड़े. उदाहरण के लिए, अगर आपने साइट का डोमेन बदला है (जैसे कि साइट को example.com से example.net पर माइग्रेट किया जा रहा है), तो रीडायरेक्ट करने के लिए, वाइल्डकार्ड सर्वर साइड का इस्तेमाल किया जा सकता है.

साइट को जटिल तरीके से माइग्रेट करने पर, आपको पुराने यूआरएल की सूची बनानी होगी और उन्हें नई डेस्टिनेशन से मैप करना होगा. आपको पुराने यूआरएल किस तरह दिखेंगे, यह आपकी मौजूदा वेबसाइट के कॉन्फ़िगरेशन पर निर्भर करता है. हालांकि, पुराने यूआरएल को देखने के कुछ आसान तरीके यहां बताए गए हैं:

  • अहम यूआरएल से शुरुआत करें. इन्हें ढूंढने के लिए:
    • अपने साइटमैप में देखें, क्योंकि हो सकता है कि Search Console में आपके सबसे अहम यूआरएल इस तरीके से सबमिट किए गए हों
    • सबसे ज़्यादा ट्रैफ़िक पाने वाले यूआरएल के बारे में जानने के लिए, अपने सर्वर लॉग या ऐनलिटिक्स सॉफ़्टवेयर देखें
    • अंदरूनी और बाहरी लिंक वाले पेजों के बारे में जानने के लिए, Search Console में आपकी साइट में लिंक वाली सुविधा देखें
  • अपने कॉन्टेंट मैनेजमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करें. इसकी मदद से, कॉन्टेंट होस्ट करने वाले सभी यूआरएल की सूची आसानी से पाई जा सकती है.
  • अपने सर्वर लॉग देखें और ऐसे यूआरएल के बारे में जानें जिनको कम से कम एक बार हाल ही में ऐक्सेस किया गया है. समय के साथ ट्रैफ़िक में होने वाले बदलाव को ध्यान में रखते हुए, अपनी साइट के लिए ऐसी समयावधि चुनें जो कारगर हो.
  • इमेज और वीडियो शामिल करें—अपनी साइट को माइग्रेट करने के प्लान में, एम्बेड किए गए कॉन्टेंट के यूआरएल ज़रूर शामिल करें. उदाहरण के लिए, वीडियो, इमेज, JavaScript, और सीएसएस फ़ाइलों के यूआरएल. इन यूआरएल को उसी तरह माइग्रेट करें जिस तरीके से आपकी वेबसाइट के दूसरे कॉन्टेंट को माइग्रेट किया जाता है.

पुराने यूआरएल से नए यूआरएल मैप करना

पुराने यूआरएल की सूची बनाने के बाद, यह तय कर लें कि किस यूआरएल को कहां रीडायरेक्ट करना है. आप इस मैपिंग को किस तरह सेव कर सकते हैं, यह साइट को माइग्रेट करने के तरीके और सर्वर पर निर्भर करता है. डेटाबेस का इस्तेमाल किया जा सकता है या रीडायरेक्ट करने के सामान्य तरीकों के लिए, अपने सिस्टम पर यूआरएल को फिर से लिखने के कुछ नियम कॉन्फ़िगर किए जा सकते हैं.

सभी यूआरएल की जानकारी अपडेट करना

यूआरएल की मैपिंग तय करने के बाद, पेजों को माइग्रेट करने के लिए आपको तीन काम करने होंगे.

  1. हर पेज के लिए, एचटीएमएल या साइटमैप एंट्री में नए यूआरएल दिखाने के लिए, एनोटेशन अपडेट करें:
    1. हर डेस्टिनेशन यूआरएल के लिए, सेल्फ़ रेफ़रेंसिंग (मौजूदा पेज पर ले जाने वाला टैग), rel="canonical" <link> टैग होना चाहिए.
    2. माइग्रेट की गई साइट पर, अलग-अलग भाषाओं या देशों के लिए बनाए गए पेज मौजूद हो सकते हैं. अगर ऐसा है और इन पेजों की व्याख्या rel-alternate-hreflang एनोटेशन इस्तेमाल करके की गई है, तो नए यूआरएल इस्तेमाल करने के लिए एनोटेशन ज़रूर अपडेट करें.
    3. अगर माइग्रेट की गई साइट का कोई मोबाइल वर्शन है, तो नए यूआरएल इस्तेमाल करने के लिए, rel-alternate-media एनोटेशन ज़रूर अपडेट करें. ज़्यादा जानने के लिए, स्मार्टफ़ोन वेबसाइटों के लिए हमारे दिशा-निर्देश देखें.
  2. इंटरनल लिंक अपडेट करें.
    नई साइट पर अंदरूनी लिंक बदलें. इसके लिए, पुराने यूआरएल की जगह नए यूआरएल डालें. ज़रूरत के हिसाब से लिंक ढूंढने और उन्हें अपडेट करने के लिए, पहले जनरेट की गई मैपिंग इस्तेमाल करें.
  3. साइट को माइग्रेट करने के लिए इन सूचियों को सेव करें:
    • ऐसी साइटमैप फ़ाइल जिसकी मैपिंग में नए यूआरएल मौजूद हैं. साइटमैप बनाने के बारे में जानकारी देने वाले हमारे दस्तावेज़ देखें.
    • आपके पुराने यूआरएल से लिंक करने वाली साइटों की सूची. आपको अपनी साइट पर ले जाने वाले लिंक Search Console में मिल सकते हैं.

301 रीडायरेक्ट के लिए तैयारी करना

मैपिंग और नई साइट तैयार होने के बाद, अपने सर्वर पर एचटीटीपी 301 रीडायरेक्ट सेट अप करें. इसे मैपिंग के मुताबिक, पुराने यूआरएल से नए यूआरएल के लिए सेट अप किया जाता है.

इन बातों का ध्यान रखें:

  • एचटीटीपी 301 रीडायरेक्ट इस्तेमाल करें. हालांकि, Googlebot कई तरह के रीडायरेक्ट के साथ काम करता है, लेकिन हमारा सुझाव है कि आप एचटीटीपी 301 रीडायरेक्ट इस्तेमाल करें.
  • रीडायरेक्ट की चेन न बनाएं. हालांकि, Googlebot, एक से ज़्यादा रीडायरेक्ट की "चेन" में 10 हॉप फ़ॉलो कर सकता है (उदाहरण के लिए, पेज 1 > पेज 2 > पेज 3), हम आखिरी डेस्टिनेशन पर रीडायरेक्ट करने की सलाह देते हैं. अगर ऐसा करना मुमकिन न हो, तो चेन में रीडायरेक्ट की संख्या कम रखें. यह संख्या तीन से पांच के बीच होनी चाहिए. रीडायरेक्ट की चेन बनाने से, उपयोगकर्ताओं के लिए इंतज़ार का समय बढ़ता है. साथ ही, सभी उपयोगकर्ता एजेंट और ब्राउज़र, लंबी रीडायरेक्ट चेन के साथ काम नहीं करते.
  • रीडायरेक्ट की जांच करें. आप अलग-अलग यूआरएल की जांच करने के लिए, यूआरएल जांचने वाले टूल का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके अलावा, आप कई यूआरएल की एक साथ जांच करने के लिए, कमांड-लाइन टूल या स्क्रिप्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं.

साइट को दूसरी जगह भेजने की प्रोसेस शुरू करना

जब यूआरएल मैपिंग सटीक हो और रीडायरेक्ट सही तरीके से काम कर रहे हों, तब आप साइट को दूसरी जगह भेज सकते हैं.

  1. साइट को दूसरी जगह भेजने का तरीका तय करें — सब एक साथ भेजना है या सेक्शन के हिसाब से:
    • छोटे और मध्यम आकार की साइटें: हमारा सुझाव है कि आप एक समय में एक सेक्शन को माइग्रेट करने के बजाय, अपनी साइट के सभी यूआरएल एक साथ माइग्रेट करें. ऐसा करने से, उपयोगकर्ता नई साइट को बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर पाएंगे. साथ ही, इससे हमारे एल्गोरिदम को साइट के माइग्रेट होने का पता लगाने और हमारे इंडेक्स को तेज़ी से अपडेट करने में मदद मिलती है.
    • बड़ी साइटें: आप बड़ी साइटों के लिए एक समय में एक सेक्शन को माइग्रेट कर सकते हैं. इससे समस्याओं पर नज़र रखना, उनका पता लगाना, और उन्हें ज़्यादा तेज़ी से ठीक किया जा सकता है.
  2. अपनी robots.txt फ़ाइलें अपडेट करें:
    • पुरानी साइट से सभी robots.txt डायरेक्टिव हटाएं. यह Googlebot को नई साइट पर ले जाने वाले सभी रीडायरेक्ट खोजने और हमारे इंडेक्स को अपडेट करने देता है. ध्यान रखें कि रीडायरेक्ट की सुविधा चालू करने पर, क्रॉलर को पुरानी robots.txt फ़ाइल का कॉन्टेंट नहीं दिखेगा.
    • नई साइट पर, पक्का करें कि robots.txt फ़ाइल सभी तरह की क्रॉलिंग की अनुमति देती है. इसमें इमेज, सीएसएस, JavaScript, और दूसरे पेज एसेट की क्रॉलिंग शामिल है. इनमें वे यूआरएल शामिल नहीं हैं जिन्हें आप क्रॉल नहीं कराना चाहते.
  3. यूआरएल मैपिंग के मुताबिक, उपयोगकर्ताओं और Googlebot को नई साइट पर रीडायरेक्ट करने के लिए, पुरानी वेबसाइट को कॉन्फ़िगर करें.
  4. Search Console में पुरानी साइट के लिए, पते में बदलाव करने का अनुरोध सबमिट करें.
  5. रीडायरेक्ट को ज़्यादा से ज़्यादा समय तक रखने की कोशिश करें. आम तौर पर, इसे कम से कम एक साल तक रखा जाता है. इतने समय तक रखने से, Google सभी सिग्नल को नए यूआरएल पर ट्रांसफ़र कर पाता है. इसमें, फिर से क्रॉल करना और पुराने यूआरएल पर ले जाने वाली दूसरी साइटों के लिंक फिर से असाइन करना शामिल है.

    उपयोगकर्ताओं के नज़रिए के हिसाब से, रीडायरेक्ट को हमेशा के लिए रखें. हालांकि, रीडायरेक्ट की वजह से उपयोगकर्ताओं को ज़्यादा समय लगता है. इसलिए, उन्हें नए यूआरएल पर बेहतर तरीके से लाने के लिए, अपने लिंक और दूसरी वेबसाइटों के ज़्यादा ट्रैफ़िक वाले लिंक को अपडेट करें.

  6. Search Console में नया साइटमैप सबमिट करें. इससे, Google को नए यूआरएल के बारे में जानने में मदद मिलेगी. अब आप चाहें, तो पुराने साइटमैप को हटाया जा सकता है, क्योंकि आने वाले समय में Google, नए साइटमैप का इस्तेमाल करेगा.

साइट को माइग्रेट करने के दौरान, Googlebot और हमारे सिस्टम को सभी यूआरएल को ढूंढने और उन्हें प्रोसेस करने में कितना समय लगता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपके सर्वर कितनी तेज़ी से काम करते हैं और इस प्रोसेस में कितने यूआरएल शामिल हैं. आम तौर पर, एक मध्यम-आकार की वेबसाइट के ज़्यादातर पेजों को माइग्रेट करने में कुछ हफ़्ते लग सकते हैं. बड़ी साइटों को उससे कहीं ज़्यादा समय लग सकता है. Googlebot और हमारा सिस्टम सभी यूआरएल को कितनी तेज़ी से ढूंढ सकते हैं और प्रोसेस कर सकते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका सर्वर कितनी तेज़ी से काम करता है और इस प्रोसेस में कितने यूआरएल शामिल हैं.

साइट को माइग्रेट करना शुरू करने के तुरंत बाद, उपयोगकर्ता अनुभव बेहतर बनाने और सर्वर का लोड कम करने के लिए, वेबसाइट पर लाने वाले ज़्यादा से ज़्यादा लिंक अपडेट करने की कोशिश करें. इनमें ऐसे लिंक शामिल हैं:

  • बाहरी लिंक: आपके मौजूदा कॉन्टेंट के लिंक वाली उन साइटों से संपर्क करने की कोशिश करें जो आपकी सेव की गई सूची में मौजूद हैं. उनसे अपनी नई साइट पर ले जाने वाले लिंक को अपडेट करने के लिए कहें. ऐसे लिंक को प्राथमिकता दें जिनकी मदद से आपकी वेबसाइट पर ज़्यादा लोग आते हों.
  • Facebook, Twitter, और LinkedIn जैसे सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म पर प्रोफ़ाइल के लिंक.
  • नए लैंडिंग पेजों पर ले जाने के लिए विज्ञापन कैंपेन.

वेबसाइट के ट्रैफ़िक पर नज़र रखना

अपनी साइट को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने की प्रोसेस शुरू करने के बाद, इस बात पर नज़र रखें कि नई साइट और पुरानी साइट पर उपयोगकर्ता और क्रॉलर का ट्रैफ़िक कैसे बदलता है. आम तौर पर, पुरानी साइट पर ट्रैफ़िक कम हो जाएगा, जबकि नई साइट पर ट्रैफ़िक में बढ़ोतरी होगी. आप Search Console और दूसरे टूल का इस्तेमाल करके, साइटों पर उपयोगकर्ता और क्रॉलर की गतिविधि पर नज़र रख सकते हैं.

साइट के ट्रैफ़िक पर नज़र रखने के लिए Search Console इस्तेमाल करना

Search Console की कई सुविधाएं, आपकी साइट को नए यूआरएल पर ले जाने की प्रोसेस पर नज़र रखने में मदद करती हैं. इनमें ये सुविधाएं शामिल हैं:

  • साइटमैप: आपने मैपिंग के दौरान, जिन दो साइटमैप को सेव किया है उन्हें सबमिट करें. शुरुआत में, नए यूआरएल वाले साइटमैप में ऐसा एक भी पेज नहीं होगा जिसे इंडेक्स किया गया है. पुराने यूआरएल वाले साइटमैप में इंडेक्स किए गए कई पेज मौजूद होंगे. समय के साथ-साथ, नए यूआरएल वाले साइटमैप के इंडेक्स किए गए पेजों की संख्या बढ़ेगी और पुराने यूआरएल वाले साइटमैप से इंडेक्स किए गए पेजों की संख्या कम होती जाएगी. कुछ समय बाद, ऐसा कोई भी पेज नहीं रहेगा जिसे पुराने यूआरएल वाले साइटमैप से इंडेक्स किया गया हो.
  • इंडेक्स कवरेज रिपोर्ट: इस रिपोर्ट के ग्राफ़, साइट के माइग्रेट होने से जुड़े आंकड़े दिखाएंगे. इसमें पुरानी साइट के इंडेक्स किए गए यूआरएल की संख्या में गिरावट और नई साइट के इंडेक्स किए गए यूआरएल की संख्या में बढ़ोतरी दिखाई जाती है. क्रॉल करने के दौरान, अचानक मिलने वाली गड़बड़ियों के लिए साइट पर लगातार नज़र बनाए रखें.
  • खोज क्वेरी: जैसे-जैसे नई साइट के पेज इंडेक्स होते जाते हैं और उन्हें खोज नतीजों में रैंक मिलनी शुरू होती है, खोज क्वेरी की रिपोर्ट में नई साइट के यूआरएल दिखने शुरू हो जाते हैं. इसमें, खोज नतीजों में मिले इंप्रेशन और साइट पर मिले क्लिक की जानकारी दिखती है.

ट्रैफ़िक पर नज़र रखने के लिए दूसरे टूल इस्तेमाल करना

अपने सर्वर के ऐक्सेस और गड़बड़ी के लॉग पर नज़र रखें. खास तौर पर, Googlebot के क्रॉल करने की प्रक्रिया, अचानक हुई गड़बड़ी से जुड़े एचटीटीपी स्थिति कोड लौटाने वाले यूआरएल, और उपयोगकर्ताओं के सामान्य ट्रैफ़िक पर ध्यान दें.

अगर आपने अपनी साइट पर कोई वेब ऐनलिटिक्स सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल किया है या अगर आपको कॉन्टेंट मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएस) से आंकड़े मिल रहे हैं, तो आपको इस तरह से ट्रैफ़िक पर नज़र रखने का सुझाव दिया जाता है. ऐसा करने से, आप पुरानी साइट से नई साइट पर जा रहे ट्रैफ़िक में बदलाव देख सकते हैं. खास तौर पर, Google Analytics में रीयल-टाइम रिपोर्ट दिखाई जाती है. साइट को दूसरी जगह ले जाने के शुरुआती समय में, यह सुविधा आंकड़े देखने के लिए काम आती है. आपको पुरानी साइट पर ट्रैफ़िक में गिरावट और नई साइट पर हुई बढ़ोतरी दिख सकती है.

साइट को दूसरी जगह ले जाने में होने वाली समस्या हल करना

जब किसी साइट के यूआरएल में बदलाव (जिसमें एचटीटीपी को एचटीटीपीएस में बदलना भी शामिल है) किया जाता है, तब ये सामान्य गलतियां हो सकती हैं. इन गलतियों की वजह से, शायद आपकी नई साइट पूरी तरह से इंडेक्स न हो पाए.

सामान्य गलतियां

noindex या robots.txt से लगाई गई रोक

noindex या robots.txt की मदद से लगाई गई वे रोक हटाना न भूलें जिन्हें सिर्फ़ साइट को माइग्रेट करने के लिए इस्तेमाल किया गया था.

अगर आपकी साइट पर robots.txt फ़ाइल नहीं है, तो कोई बात नहीं. हालांकि, अगर robots.txt फ़ाइल का अनुरोध हो और वह मौजूद न हो, तो पक्का करें कि जल्दी से 404 गड़बड़ी दिखाई जाए.

जांच करने के लिए:

  • अपनी एचटीटीपीएस साइट में अपनी robots.txt फ़ाइल की जांच करें और देखें कि क्या उसमें कोई बदलाव करने की ज़रूरत है.
  • ऐसे पेजों के लिए यूआरएल जांचने वाला टूल इस्तेमाल करें जो नई साइट पर Google के लिए उपलब्ध नहीं हैं.

गलत रीडायरेक्ट

पुरानी साइट से नई साइट पर रीडायरेक्ट की जांच करें. अक्सर लोग नई साइट के लिए गलत (जो मौजूद नहीं है) यूआरएल डाल देते हैं.

क्रॉल करने पर मिली दूसरी गड़बड़ियां

इंडेक्स कवरेज रिपोर्ट की जांच करके देखें कि साइट को माइग्रेट करने के बाद, आपकी नई साइट में दूसरी गड़बड़ियां बढ़ तो नहीं गई हैं.

बढ़े हुए ट्रैफ़िक को संभालने के लिए ज़रूरी क्षमता का न होना

साइट को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के बाद, Google आपकी साइट को सामान्य से ज़्यादा बार क्रॉल करेगा. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि ट्रैफ़िक को पुरानी साइट से नई साइट पर भेजा जाता है. नई साइट पर होने वाले दूसरे क्रॉल के साथ, पुरानी साइट वाली क्रॉलिंग को भी नई साइट पर रीडायरेक्ट किया जाता है. पक्का करें कि आपकी साइट में Google से बढ़े हुए ट्रैफ़िक को संभालने के लिए ज़रूरी क्षमता हो.

अगर आप ऐप्लिकेशन में अपने वेब पेज खोलते हैं, तो ऐप्लिकेशन के लिंक अपडेट करके नए यूआरएल डाल दें. ऐसा, पुराने पेजों से नए पेजों के रीडायरेक्ट लागू करने से पहले करें. ऐसा न करने पर, खोज नतीजों में Google, नए यूआरएल को ऐप्लिकेशन का इस्तेमाल करके खोलने का सुझाव नहीं देगा. इसके बजाय, वह उपयोगकर्ताओं को ब्राउज़र की मदद से वेबसाइट पर ले जाएगा.

साइटमैप अपडेट न करना

ध्यान रखें कि आपके सभी साइटमैप में अपडेट किए गए नए यूआरएल मौजूद हों.

डेटा हाइलाइटर को अपडेट न करना

अगर आपने पुराने पेजों को मैप करने के लिए, डेटा हाइलाइटर का इस्तेमाल किया था, तो अपनी नई साइट को भी फिर से ज़रूर मैप करें.